क्या होता है ‘बचपन’?
कोई यह सवाल पूछे तो
चेहरे पर एक अलग सी शांति और मुस्कान आ जाती है| हम सब की जिंदगी का सबसे यादगार
लम्हा जिसका स्मरण करते ही सारी थकावट, सारी परेशानी दूर हो जाती है| बचपन की
यादों को संजोग कर हर कोई इस तरह रखता है कि कहीं सारी यादें धुंधली ना पड़ जाए|
वो माँ के हाथों से
खाना खाते-खाते भाग जाना, और फिर माँ का अलग-अलग पक्षिओं और जानवरों के नाम लेकर
वो रोटी के कौर खिलाना, वो पापा के काम से लौटने पर उनकी जेब टटोलना कि आज कौन सी
चौकलेट आई है? वो टीवी देखते-देखते सोफे पे सो जाना और सुबह उठना तो अपने आप को
बिस्तर पर पाना| वो दोस्तों के साथ खेलना, पल भर में रूठना और पल भर में मान जाना, नए-नए खेल खेलना,
हँसना, खिलखिलाना, बिना किसी बात की चिंता किए मद-मस्त अंदाज में खुशियों को नई
उड़ान देना| वो स्कूल का पहला दिन नए यूनिफार्म, नए जूते, नया बस्ता, नए दोस्त, नए
शिक्षक| हर कोई नया फिर भी सब कुछ कितना अच्छा लगता था|
हमारा परिवेश एक नई
दुनियाँ में होने जा रहा था जैसे मछली को पानी मे आकर जीने की नई किरण, नया वजूद
मिलता है वैसे ही हमें एक अलग पहचान मिलने वाली थी| बचपन की इतनी सारी यादें है कि
उसे शब्दों मे पिरोहना काफी मुस्किल है|
आज जब सुबह आँख खोलती हूँ तो अपने आप को अकेला
पाती हूँ आज ना वो माँ है जो चीख-चीख कर चादर हटाती थी और ना वो पापा है जो माँ के
मुझपर चीखने पर उन्हें डांट लगाते थे| आज जब खिड़की से बाहर कड़ी धुप में छोटे-छोटे
बच्चों को खेलते देखती हूँ तो ऐसा लगता है मानों यह कड़ी धूप भी इन्हें मीठी छाओं
का सुख दे रही हो| बचपन मे जो नजर हर किसी को अपना समझती थी आज वही नजर अपना और
पराया देखती है, अपने अपने रहें नही और परायों से अपनेपन की उम्मीद नही|
आज जब भी अपने आप को
बेबस और लाचार पाती हूँ तो माँ को याद करती हूँ की अज वो इस जगह पर होती तो क्या करती??
हाँ, खो गया है बचपन कहीं..

i am becoming a fan of your work..
ReplyDeleteDi Thank you soo much :)
Deletevery good sonali...keep it up..:)..bhot acha lhika h..:-*
ReplyDeletethanku saadim :*
DeleteNice 👍
ReplyDeletethanks
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