‘नौजवान’ हमारे देश
की नयी पीढ़ी, हमारा भविष्य| आज मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नही होता की हमारे
युवा, हमारे देश का भविष्य ‘बेरोजगारी’ जैसे समस्याओं तले दबा हुआ है| यह एक ऐसी
समस्या है जिससे आज हर कोई जुझ रहा है|
अगर बात की जाए हमारे देश के आर्थिक व्यवस्था की तो
आज भी भारत के आधे से ज्यादा गावं, कुचे, और शेहरों में गरीबी से ना जाने कितने
नौजवानों की जान जा रही है| बेरोजगारी का कीड़ा इस कदर फैला है कि इस देश के
कोने-कोने को दूषित करता जा रहा है| भगवान ने हमें दो हाथ, दो पांव, एक मस्तिष्क
जैसे अनेक अंगो से नवाजा है, जिसका उपयोग कर हम अपना जीवन यापन कर पाएं| अगर यह सब होने के बावजूद भी हमें अपने
जीवन यापन करने मे तकलीफ़ आए या हम इसका सही उपयोग ना कर पाए तो इससे ना की सिर्फ
हमारा भविष्य बल्कि हमारे देश का भविष्य भी खतरे मे दिखाई देता है| देश के कोने-कोने
से यह ललकार उठ रही है कि ‘बेरोजगारी को खत्म करो’, पर आज भी स्थिति वही बरकरार है और ये
कह सकते है की बद से बद्तर होते जा रही है|
सोचने वाली बात यह
है कि ऐसे महत्वपूर्ण शिर्षक को लेकर अभी तक सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नही उठाया
गया है|‘बेरोजगारी’ का सबसे बड़ा कारण हमारे देश की जनसंख्या है| आज पुरे विश्व मे
भारत जनसंख्या की दौर मे दूसरे स्थान पर है और यह भी अनुमान लगाया जा चुका है कि
२०३० तक भारत ‘चाइना' को पीछे छोड़ पहले स्थान पर उत्रिन हो जायेगा| इस
बढती जनसंख्या को देखते हुए भी भारत सरकार ने आज तक कोई पॉलिसी नही लगाई जो बढती
जनसंख्या को रोकने में मददगार साबित हो| सरकार, जिस अनुपात में जनसंख्या बढती है, उस
अनुपात में नौकरियों का सृजन नहीं कर पाती| नौकरी की कमी की वजह से बेरोजगारी चरम
सिमा पर दिखाई दे रही है|
इसका दूसरा कारण शिक्षा
व्यवस्था की कमी भी है| आज गाँव-गाँव में विद्यालय की कमी, विद्यालय होते हुए भी
शिक्षकों की कमी, या शिक्षक होते हुए भी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा जैसी कमियों से
योग्य युवाओं को भी सही दिशा नही मिल पा रही है, जिससे की
बेरोजगारी की समस्या और जटिल होते जा रही है| तीसरा कारण, सरकार की तरफ से रोजगार
प्रदान करने की सुस्ती भी मानी जा सकती है| सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण विषय की
अनदेखी भी प्रमुख वजह है जिसने हमारे देश के भविष्य को अँधेरे में कर रखा है|
किन्तु बेरोजगारी की समस्या के लिए केवल सरकार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता,
भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कार्य की प्रतिष्ठा को नहीं समझते हैं और ऐसी
नौकरियों की प्रतीक्षा करते रहते हैं जिनमें काम तो कम करना पड़े और प्राप्ति अधिक
हो| उनकी सुस्ती और कठिन कार्य में लगने की अनिच्छा उनको बेरोजगार रखती है|
बेरोजगारी की समस्या
का शीघ्र-से-शीघ्र हल निकालना होगा| सबसे बड़ी आवयश्कता मानव-शक्ति का नियोजन है
जिसकी हमारे देश के युवाओं को सबसे ज्यादा जरुरत है|

No comments:
Post a Comment