कहते
है हर एक नई चीज, एक नई सोच एक नए अनुभव को जन्म देती है| जैसे एक लहर आपको किनारे
तक ले जाने की क्षमता रखती है, ठीक वैसे ही एक नया अनुभव आपको उम्दा सोच तक ले
जाने की क्षमता रखता है|
जब
मैं उन बच्चों से मिलने वाली थी, मेरे भी मन में आप सब की तरह हजार सवाल पनप रहे
थे, उसे डर नही कह सकते पर हाँ मन में अजीब ख्यालात, अजीब प्रश्नों का उठना कुछ डर
जैसा ही था| पहले मुझे लगा शायद सिर्फ मुझे ही उस हल्के से डर का अनुभव हो रहा है
परन्तु जब मैंने अपने साथियों के चेहरे देखे तो बिना कुछ कहे उनके चेहरे के भाव से
साफ मालुम चल रहा था कि उनके अन्दर भी सवालों की पोटरी ने डेरा जमाना शुरू कर दिया
है| सवाल जैसे वो दिखते कैसे होंगे? उनकी गतिविधियाँ क्या होगी? क्या वो हम सब की
तरह ही होंगे या कुछ अलग? क्या हम उनके बीच सुरक्षित महसुस करेंगे? ऐसे अन्गिनत
सवालों ने जैसे मन और दिमाग को अपने वश में कर लिया था|
काफी
सोचने के बाद जब हम मुख्य द्वार से अन्दर गए तो एक लम्बा रास्ता उन बच्चों की तरफ
जा रहा था| जैसे जैसे हम अपने कदम बढ़ा रहे थे वैसे वैसे उन बच्चों से मिलने की
अन्तरइच्छा बढती जा रही थी| सेवा कुटिर नामक इस जगह को एक संस्था चलाती है जिसका
नाम एस.पी.वाई.एम है| इस संस्था के अन्दर अन्गिनत आश्रय है उनमें से एक सेवा कुटिर
भी है जहाँ नशे के लत के कारण जुर्म करने वाले नाबालिक बच्चों को जेल से निकाल कर सुधरने
के मौके दिए जाते है या यह कह सकते है कि उन्हें एक आसरा दिया जाता है जहाँ वो अपने
बीते हुए काले कल को पीछे छोड़ सुनहरा आज बनाने के लिए अपने कदमों को सही दिशा, सही
पथ पर अग्रसर करें|
हम
जैसे ही थोड़ा अन्दर गए हमें बताया गया कि बच्चे अपनी कक्षा में बैठे है, हम वहां
जाकर उनसे मिल सकते है| धीरे-धीरे हम उनके पास गए और चुपचाप उनके पीछे बैठ गए| कुछ
बच्चे हमें देखकर, हमसे मिलकर काफ़ी उत्साहित थे, तो कुछ एक कोने में बैठकर बस हमें
दूर से देखे जा रहे थे| हर एक चेहरे की अपनी एक अलग कहानी थी, और ताजुब की बात यह
है कि सारे हमें अपनी कहानी सुनाना चाहते थे| वो चाहते थे की हम उनके बारे में
जाने, शायद उन अनजान चेहरों को एक नयी पहचान की खोज थी जो कही ना कही उन्हें हमारे
द्वारा प्राप्त हो रही थी| उनकी मासुमियत को देखकर ऐसा बिलकुल प्रतीत नही हो रहा
था जैसे वो किसी संगीन जूर्म को अंजाम देकर यहाँ आये है| उनसे ढेर सारी बातें कर
हमें यह पता चला कि वो जूर्म करना नही चाहते थे, परन्तु नशे की लत ने उन्हें ऐसे
काम करने के लिए प्रोत्साहित किया|
कहते
है असली हीरे की परख सिर्फ एक जौहरी ही जान सकता है| हम खुद को जौहरी तो नही कह
सकते पर वो हीरे जरुर थे| जब हमने उनसे
उनके हुनर के बारे मे पूछा तो उनके जवाबों को सुनकर ऐसा लगा मानो इंसान के अन्दर
लाख खूबियाँ हो पर जब तक उन्हें परखने वाला कोई नही मिलता उन खूबियों का कोई मोल
नही रह जाता| कोई अच्छा गाता है तो कोई अच्छा लिखता है, कोई नए-नए पकवान बनाना
जानता है तो कोई चित्रकला मे अच्छा है| ढेरों हुनर से लदे इन बच्चों को देखकर बस एक
ही ख्याल आता है कि काश यह हुनर सही दिशा में प्रयोग किया गया होता तो आज उनकी
जिन्दगी एक सही मार्ग पर होती पर कहते है जब इश्वर एक दरवाजा बंद कर देता है तो
दूसरा दरवाजा भी स्वयं ही खोल देता है| उन बच्चों का इस संस्था के छाँव मे आना ही
एक नए पथ की तरफ इशारा है|
