Sunday, 21 February 2016

शुक्रिया || (ThankYou)


जब-जब मैं चीखा, वो तेरा दौड़ कर आना याद आया ||

पहला कदम बढ़ाने पर, वो तेरा सँभालने के लिए हाथ बढ़ाना याद आया ||

पढाई ना करने के बहनों के बीच, वो तेरा दिखावटी गुस्सा याद आया ||

स्कूल में होने वाली नोंक-झोंक के बीच, वो तेरा चुपके से मुस्कुराना याद आया ||

आधी रात को डर से उठने पर, वो तेरा पसिने को पोछना याद आया ||

टीचर्स की डांट से बचाने के लिए, वो तेरा बार-बार गलतियाँ छुपाना याद आया ||

मार्क्स कम आने पर, वो तेरा प्यार से समझाना याद आया ||

जब-जब हारने का डर सताया, वो तेरा हौसला बढ़ाना याद आया ||

पहली-पहली मुलाकात पर, वो तेरा प्यार से देखना याद आया ||

कोशिशों से हिम्मत हारने पर, वो तेरा नामुमकिन को मुमकिन करवाना याद आया ||

उम्मीदों के टूटने पर, वो तेरा नए उम्मीदों को जगाना याद आया ||

सबकी नजर तुमपे होने पर, वो तेरा नजर का टिका लगाना याद आया ||

ढेरों जिम्मेदारी आने पर, वो तेरा हिम्मत के साथ हाथों में हाथ देना याद आया ||

थका-हारा घर आने पर, वो तेरा प्यार से गले लगाना याद आया ||

बुढ़ापे में हजारों बिमारियों के बीच, वो तेरा चुपके से मिठाई खिलाना याद आया ||

आँखों से आंसु आने पर, वो तेरा सबपे चिल्लाना याद आया ||

अंतिम साँसों के बीच, वो तेरा फुट-फुट कर रोना याद आया ||

जिसकी तलाश हम सभी को है, सबकी जरुरत, सबकी दवा ||

         वो प्यार का शपर्श याद आया ||

      शुक्रिया हमारी जिन्दगी में आने के लिए ||

        Dedicated to those who love us unconditionally…