अमीरों के लिए विलासिता,
गरीबों के लिए दो वक़्त की रोटी|
मध्यम वर्गियों के लिए सिर पे छत,
जिन्दगी को जीने का नाम देने के लिए ना जाने हम कितने वर्गों में बटें है|
परन्तु मेरे हिसाब से जीने के लिए सपनों का होना सबसे महत्वपूर्ण है|
सपने उन सायों की तरह है जिन्हें हम बेपनाह स्पर्श करने की तमन्ना रखते है|
उन सायों को छूने की कोशिश में बढ़ते बढ़ते काफी आगे निकल जाते है जहाँ से सारे सपने पास दिखने लगते है|
सपनों की छलांग हमें मीलों की दूरी चंद लम्हों में तय कराने की छमता रखती है|
बेवजह सपने देखने में कोई बुराई नहीं, पर उन सपनों को अपने अन्दर दबा देना गलत है| उन आँखों की कद्र करें जो सिर्फ सपनें नहीं देखती पर उन्हें हकीकत की ज़मीन में गढ़ने का हुनर भी सिखाती है|
लोग कहते है सपनें खुली आँखों से देखो, मेरी नजर में सपनें बंद आँखों से ही देखो पर जब उन आँखों को खोलो उन सपनों को पूर्ण करने की कोशिश में जुट जाओ|
सपने उन सफ़ेद पन्नो की तरह है जिस पर स्याही से कुछ भी लिखा जा सकता है, जहाँ ना किसी प्रकार का बंधन और ना ही कोई डर है|
कभी सोचा है, अगर सपने ना होते तो क्या होता?
कोई अख़बार बेचने वाला ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम ना होता|
कोई चाय बेचने वाला, हमारे देश का प्रधानमंत्री ना होता|
और कोई पेट्रोल पंपों पे काम करने वाला धीरू भाई अम्बानी ना होता|
सपने हमसे नहीं, हम सपनों से बने है|
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